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बिहार क्रिकेट में इन तीन बंदरों से खिलाड़ी और पदाधिकारी रहें सावधान :- संजय सिंह

पटना। बीसीसीआई अपने घरेलू सत्र- 2021-22 की आगाज आगामी 28 सितंबर 2021 से अंडर-19 पुरुष वर्ग वीनू माकड़ ट्रॉफी और महिला वर्ग अंडर-19 वीमेंस एकदिवसीय टूर्नामेंट से करने जा रही है। 

जिसमें बिहार क्रिकेट संघ द्वारा चयनित 22 सदस्यीय बिहार अंडर-19 पुरुष व महिला वर्ग की टीम सहित सभी सपोर्टिंग स्टाफ कल 20 सितंबर को मोहाली और विशाखापट्टनम पहुंच कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।

जिसके बाद बीसीए टूर्नामेंट कमेटी के चेयरमैन संजय सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बिहार के नवोदित खिलाड़ियों को दिग्भ्रमित कर अपने अस्तित्व बचाने के लिए राजनीति का शिकार बनाने वाले गिरोह पर हमलावर हो गए हैं और उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये तीनों बहुरूपीए ऐसे हैं जो बिहार की अस्मिता और नवोदित खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में हीं विश्वास रखते हैं यही इनकी विशेष पहचान है। 

वहीं बिहार क्रिकेट की बात करें तो ये तीनों बहुरूपीए बिहार क्रिकेट में तीन बंदरों की भांति हीं कार्य कर रहे हैं। जिनकी विशेष पहचान यह है कि पहला बंदर बोलता है कि ऐसा गैर जिम्मेदारी काम करो जिसे बिहार क्या पूरा देश-दुनिया अपनी खुली आंखों से देखे।

दूसरा बंदर बोलता है कि ऐसा मनगढ़ंत झूठ बोलो जिस पर खिलाड़ी क्या पूरा देश-दुनिया विश्वास कर लें। जबकि तीसरा बंदर ऐसा कार्य में विश्वास रखता है कि अपनी दोनों कानों को इस कदर बंद कर लो की सच्चाई की कोई गूंज दूर-दूर तक सुनाई ना दें और पहला व दूसरा बंदर के बताए गए रास्ते पर आगे चलते रहो। जो बापूजी के तीन बंदर के ठीक विपरीत कार्य करते हैं।

श्री सिंह ने आगे कहा कि ऐसे विचित्र इंसान से हम- आप और सभी खिलाड़ियों को भी सावधान रहने की आवश्यकता है जो हमेशा अलग-अलग रूप में अपना वेशभूषा बदलकर लोगों के समक्ष जाते हैं और कभी आपको जातीय बंधन से जोड़ने का काम करेंगे, तो कभी आपको बीसीए के शीर्ष पदाधिकारी बनाने का प्रलोभन भी देंगे, कभी खुद को सीएबी का पदाधिकारी बताएंगे, तो कभी सारण में जाकर खुद को बीसीए का पदाधिकारी बताएंगे, कभी बीसीसीआई के बड़े-बड़े पदाधिकारियों से अपनी खास निजी संबंध बताएंगे, तो कभी माननीय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का पाठ्य भी पढ़ाएंगे।

लेकिन सच्चाई यह है कि इस गिरोह के सरगना को समाज व खेल के विकास से कोई लेना-देना  नहीं बल्कि इनकी मंशा साफ है कि लोगों को गुमराह कर बीसीए में फूट डालो शासन करो की नीति के तहत अपने अस्तित्व को कैसे बचाया जाए।

 इस कुकृत्य में इस कदर अंधा हो गये हैं कि सही- गलत का आकलन भी नहीं कर पा रहे हैं।

 तभी तो छपरा में अंडर-19 पुरुष वर्ग के कैंप का उद्धघाटन जब बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकेश्वर प्रसाद ने की है तब से इनकी एक आंख में बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी भाजपाई समर्थक नेता नजर आते हैं।  

वहीं इनकी दूसरी आंखों में प्रेम रंजन पटेल भाजपाई समर्थक नेता नहीं बल्कि किसी अन्य पार्टी के समर्थक नेता नजर आ रहे हैं क्या यही सच्चाई है।

जबकि इससे पूर्व भी पिछले लोगों के कार्यकाल में मोइनुल हक स्टेडियम में  पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व मंगल पांडे सहित अन्य नेतागण खिलाड़ियों का हौसला अफजाई कर चुके हैं। तो क्या उस समय खेल में राजनीतिकरण नहीं हो रही थी। फिर तो बात वही हो गई कि हम करे तो राम की लीला और दूसरे करें तो रास लीला, वाह रे खेला।

इस कृत्य से इनकी मंशा समझी जा सकती है कि बिहार के नौनिहाल खिलाड़ियों को गुमराह कर जो फर्जी ट्रायल लिया गया उस फर्जी ट्रायल में भी वैसे लोगों को चयनकर्ता बनाया जो बिहार को शर्मसार कर देने वाली घटना ऑपरेशन क्लीन बोल्ड की स्ट्रिंग ऑपरेशन में शामिल थें।

आखिर ऐसा होना भी लाजमी है क्योंकि इस फर्जी ट्रायल के सरगना खुद उस स्ट्रिंग ऑपरेशन के एक बड़ा हिस्सा थें। 

जबकि बड़े हास्यप्रद बात है यह कि इस स्ट्रिंग ऑपरेशन के मास्टरमाइंड जिनका चरित्र हमेशा बीसीए की छवि को धूमिल कर बीसीसीआई के पटल से बीसीए का नामो-निशान मिटाने का रहा है वो आजकल इनके विशेष शुभचिंतक और सहयोगी बने हुए हैं।

मतलब साफ है कि ये सभी बरसाती मेंढक की तरह क्रिकेटिंग सीजन में अपने चारदीवारी से बाहर निकलकर निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए लोगों बीसीए को ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से तरह-तरह के हथकंडे आजमाते हुए खेल और खिलाड़ियों का हितकर बनने का घड़ियाली आंसू बहाते फिरते हैं।

जबकि वास्तविक रूप में ये लोग अपने पुत्र मोह में फंसे हुए हैं कोई अपने पुत्र को बीसीए का पदाधिकारी बनाना चाहते हैं तो कोई बिहार की टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाना चाहते हैं।

संजय सिंह ने कहा कि आज बीसीए अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी जी के नेतृत्व में बिहार क्रिकेट संघ नित्य- निरंतर ऊंचाइयों को छू रहा है और बीसीए अध्यक्ष तमाम बाधाओं को काटते हुए आगे बढ़-चढ़कर खेल और खिलाड़ियों के हित में कार्य कर नकारात्मक शक्तियों ध्वस्त करते हुए उनके दांत खट्टे कर रहे हैं।

मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर इतनी बेचैनी क्यों है? मौका तो आपको भी मिला था लेकिन आपने  क्या किया ? आपके समय में रातों-रात जिला बदले जाते थें जिस डंस को आज तक जिला पदाधिकारी भूले नहीं हैं और अगर आप इतने हीं खेल व खिलाड़ियों के हितकर हैं तो ऐसा गंदा खेल में खेल क्यों ?  बीसीए के विकास में बाधा डालने के लिए बीसीए अकाउंट को बंद कराया गया क्यों ? बारंबार जिला पदाधिकारियों को गुमराह करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है क्यों ?

जब इस प्रकार के असंवैधानिक कार्यों में यह गिरोह नाकाम रहा तो अपने आपमें लोग पद बांट लिए और खुद हीं अध्यक्ष बनकर फर्जी ट्रायल कराने का बीड़ा उठा लिया ।

आज पुरा बिहार इस जालसाज गिरोह से जवाब मांग रहा है की इनके द्वारा ली गई फर्जी ट्रायल के चयनित खिलाड़ी बीसीसीआई के किस टूर्नामेंट का हिस्सा है और वर्तमान में कहां हैं ? 

क्रिकेट के ऐसे सरफीरों व जालसाजों पर बिहारी खिलाड़ियों के भावनाओं व उनके प्रतिभा के साथ भद्दा मजाक उड़ाने, खिलाड़ियों को गुमराह कर फर्जी ट्रायल लेने, बीसीए पदाधिकारी होने का झूठा दावा करने जैसे अन्य कुकृत्य कार्यों के माध्यम से बिहार की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने के उपरांत अब क्यों ना फर्जीवाड़ा का मुकदमा इस गिरोह पर दायर कराया जाए।


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