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शारीरिक शिक्षकों को भी प्रधानाध्यापक बनाया जाय

राजकीय/राजकीयकृत/प्रोजेक्ट/उत्क्रमित उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक नियुक्त करने एवं माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को सैद्धान्तिक विषय के रुप मे शामिल करने हेतु बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल ( एनडीए ) के उपनेता प्रो.नवल किशोर यादव ने बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय/राजकीयकृत/प्रोजेक्ट/उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति अनुसंशा की गई है लेकिन डीपीएड/बीपीएड योग्यताधारी शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित शिक्षकों को जो ए एमए एवं समतुल्य उच्च योग्यताधारी हैं को इससे वंचित रखा गया है। 

पूर्व के आदेश ज्ञापांक - 6066,दिनांक -24.11.1986 एवं ज्ञापांक -400,दिनांक -25.03.2014 के द्वारा शारीरिक प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त किये जाते रहें हैं। ज्ञातव्य हो कि एनसीटीई के प्रावधान में भी बीएड एवं डीपीएड/बीपीएड की योग्यता को समतुल्य माना गया है। 

प्रो.नवल किशोर यादव ने यह भी कहा कि माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा सीडब्ल्यूजेसी संख्या - 1820/2018, दिनांक -02.09.2019 एवं माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एसएलपी अपील संख्या - 1247/2013 में पारित न्याय निर्णय में डीपीएड/बीपीएड योग्यताधारी शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित शिक्षकों को बीएड के समतुल्य मानते हुए प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त करने के योग्य माना है। 

भारत सरकार के नयी शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा विषय को मुख्य विषय के रूप में शामिल किया गया है। ज्ञातव्य हो कि बिहार के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड ( बिबोस ) में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षा में शारीरिक शिक्षा को मुख्य विषय के रूप में शामिल किया गया है। साथ हीं केंद्रीय विद्यालय संगठन एवं नवोदय विद्यालय सहित सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड में भी शारीरिक शिक्षा मुख्य विषय के रूप में स्थापित है।

प्रो.नवल किशोर यादव ने जोर देकर कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा को सैद्धान्तिक विषय के रूप में बिहार सरकार को शामिल करना न केवल आवश्यक एवं समीचीन प्रतीत होता है वरना वर्तमान समय ( करोना जैसी वैश्विक महामारी ) में इसकी उपयोगिता और बढ़ गई है। 

हम ओलंपिक खेलों में पदक की उम्मीद करते हैं और राज्य के खिलाड़ियों की सहभागिता  चाहते हैं लेकिन विद्यालय व महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षा हासिये पर है। इसलिए राज्य सरकार को संज्ञान लेते हुए शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित शिक्षकों को अन्य विषयों के शिक्षकों की तरह प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में वरीयता का लाभ प्रदान करते हुए नियुक्ति संबंधी आदेश निर्गत करनी चाहिए।


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