ADV

पटना जिला लीग को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे है पीडीसीए के तथाकथित अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रणवीर :- अरुण कुमार सिंह

पटना:- पटना जिला क्रिकेट एसोसिएशन के तथाकथित अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रणवीर ने 7 तारीख को मीडिया के माध्यम से यह बताया कि अरुण कुमार सिंह द्वारा पीडीसीए लीग कराने की प्रकाशित सूचना भ्रामक है एवं उसमें कोई भी खिलाड़ी भाग ना लें साथ ही उनके द्वारा कराये/संचालित कराये जाने वाला लीग ही अधिकारिक है। 

यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा की पीडीसीए के स्वामित्व (टाइटल सूट) का मामला माननीय निचली अदालत में विचाराधीन है तथा माननीय न्यायालय का अंतिम निर्णय आना शेष है, अर्थात् अब तक पटना जिला क्रिकेट संघ (पीडीसीए) पर किसी भी पक्ष का स्वामित्व निर्धारित नहीं है। यहाँ यह भी उल्लेख करना जरूरी (समीचीन) होगा कि माननीय निचली अदालत द्वारा पूर्व में दोनों पक्षों को पीडीसीए में किसी प्रकार की कार्य पर रोक लगाई थी। कालांतर में दोनों पक्षों के सुनवाई के पश्चात दोनों पर से रोक हटा ली (प्रति संलग्न) तथा दोनों पक्षों में से किसी को पीडीसीए की गतिविधियां (Activity) करने से नहीं रोका। 

आपको यह भी याद दिलाता चलूँ कि तथाकथित अध्यक्ष, पटना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन श्री प्रवीण कुमार प्राणवीर द्वारा संघ के चुनाव की सूचना प्रकाशित किये जाने के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एक समादेश याचिका दायर की गयी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 29/06/2018 को एक आदेश पारित (प्रति संलग्न) करते हुए तथाकथित अध्यक्ष, पटना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन श्री प्रवीण कुमार प्राणवीर द्वारा प्रचारित चुनाव पर रोक लगाई। 

वर्णित तथ्यों से यह स्पस्ट है कि ना तो माननीय निचली अदालत और ना हीं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा उस पक्ष को पटना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन का उतराधिकारी घोषित किया है ना हीं हमलोगों को पटना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के किसी प्रकार की कार्य करने से रोक लगाया है। अतः श्री प्रवीण कुमार प्राणवीर द्वारा मीडिया के माध्यम से प्रकाशित सूचना भ्रामक, अधिकार क्षेत्र के बाहर तथा दोनों माननीय न्यायालयों द्वारा पारित आदेश के प्रतिकूल है। 

पटना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन से पंजीकृत टीम के अध्यक्षों/सचिवों से अनुरोध है कि भ्रामक खबरों के बहकावे में पड़े बिना इस पक्ष द्वारा प्रकाशित लीग मैच में दोनों माननीय न्यायालयों द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए निर्भीक होकर भाग लें। 



Post a Comment

0 Comments