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प्रतिभावान खिलाड़ियों को दरकिनार करने से बिहार क्रिकेट का भविष्य अधर में


बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में अभी हाल में ही अंडर-16 के सेलेक्शन में उलट-फेर का मामला सामने आया है। जहाँ प्रतिभावान खिलाड़ियों को दरकिनार करके उनके जगह दूसरे खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है। ऐसे में खिलाड़ी तो परेशान है ही लेकिन उनके साथ उनके माता -पिता भी परेशान है।


इस मामले में क्रीड़ा न्यूज़ ने कुमार श्रेय से बात करके मामले की तह तक जाने की कोशिश की। कुमार श्रेय ने अपने परफॉर्मेंस के बारे में बात साझा करते हुए कहा कि मेरे परफॉर्मेंस को देखकर जूनियर चयन समिति के चेयरमैन और मुख्य चयनकर्ता ने ट्राइल में मुझे पांच स्टार रेटिंग दिया। उनके पांच स्टार रेटिंग देने के बाबजूद भी मुझे टीम में चयन नही किया गया। मुझे यह कहा गया कि तुम्हारा डॉक्यूमेंट वेरीफाई नही है।

अब सवाल यह उठता है की जब डॉक्यूमेंट क्लेयर ही नही था तो बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने खिलाड़ियों को ट्राइल पर क्यों बुलाया। कई न्यूज़पेपर में यहाँ तक लिख दिया गया कि ये लड़के सीधे चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे। एक और सवाल यह है कि क्या न्यूज़पेपर खुद से ये खबरें प्रकाशित कर रही है या बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने यह खबरें भेजी है। अगर बीसीए ने खबरें भेजी है, तो फिर खिलाड़ियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर टीम में चयन नही किया जा रहा है।

ऐसा क्यों हो रहा हमने ये भी जानने की कोशिश की।


सबकुछ देखने के बाद पता चल रहा है कि जूनियर चयन समिति के चेयरमैन मनीष ओझा, जो एक निजी क्रिकेट एकेडमी के पार्टनर है और उस एकेडमी के कोच के बिहार अंडर-16 के पूर्व कोच रॉबिन कुमार है। ये दोनों एक ही एकेडमी के जुड़े हुए है। अब सोचिये की एक जूनियर चयन समिति के चेयरमैन वही दूसरे बिहार अंडर -16 के पूर्व कोच । ऐसे में conflict of interest का भी मामला सामने आ रहा है।

ये सब बातें सामने आने के बाद बीसीए और उनके सेलेक्टर्स कई सवालों के घेरे में घिरे है। खबरें तो यह भी आ रही है कि कुछ खिलाड़ियों का बीसीसीआई से निबंधन ही नही हुआ है, फिर भी वो टीम में है। लेकिन अभी तक बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने इस बारे कोई जवाब नही दिया है।


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